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झालावाड़, 16 जुलाई । जनाना चिकित्सालय, झालावाड़ में एक महिला की डिलीवरी के बाद कथित रूप से इलाज में लापरवाही के कारण उसकी मृत्यु हो गई। मृतका के पति सुधीर मेवाड़ा ने अस्पताल प्रशासन और संलग्न स्टाफ के खिलाफ इलाज मे लापरवाही
का आरोप लगाते हुए गुरूवार को एसपी को परिवाद देकर घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पिडित के अनुसार, 07 जुलाई को उसकी पत्नी को सीएचसी (सेटलाइट) अकलेरा में भर्ती कराया गया था और वहां से रैफर कर के सरकारी एम्बुलेंस से रात 11:28 बजे झालावाड़ एसआरजी अस्पताल लाया गया। 08 जुलाई को अस्पताल के जनाना वार्ड में डिलीवरी से पहले स्टाफ ने 2,100 रुपये की मांग की।शाम 4:14 पर सामान्य प्रसव हुआ और नवजात शिशु का जन्म हुआ। परंतु प्रसव के बाद प्रार्थी की सास ने बताया कि महिला को भारी रक्तस्राव हुआ।प्रसव के बाद प्रार्थी की सास कौशल्या बाई द्वारा 2100/- रूपये नगद दिया गया।
सुधीर मेवाड़ा का कहना है कि उन्होंने तत्काल अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर, स्टाफ व नर्स को रक्तस्राव के बारे में सूचित किया और खून की व्यवस्था करने का निवेदन किया, पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। प्रार्थी का दावा है कि अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज पर यह घटना कैमरे में दर्ज है। यदि समय रहते खून उपलब्ध कराया गया होता तो महिला की जान बच सकती थी। शाम के बाद रात लगभग 8:28 बजे प्रार्थी को उनकी पत्नी के निधन की सूचना मिली।
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि मृतका की फाइल पर कुछ कागजों पर बाद में जानकारी भरी गई और उन पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
टीकाकरण के मामले में भी आरोप हैं: नवजात को बर्थ-इम्युनाइजेशन (बीसीजी, हेपेटाइटिस बी एवं ओरल पोलियो) तुरंत नहीं लगाए गए। अस्पताल के कंप्यूटर सिस्टम में टीके की एंट्री दिखी परंतु टीकाकरण कक्ष के रजिस्टर में उसकी कोई एंट्री नहीं मिली। बाद में परिवार ने स्वयं 16 जुलाई को बच्चे का टीकाकरण करवा दिया। पिडित ने बताया कि अगर वे रिकॉर्ड चेक करके यह बात न जानते होते तो भविष्य में बच्चे को होने वाली स्थायी समस्याओं की आशंका बनी रहती।
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन से पोस्टमार्टम कराने की भी गुहार लगाई, जिसे उन्होंने बताया कि स्वीकार नहीं किया गया। पिडित परिवार तीन नन्हे बच्चों का पालन-पोषण भी कर रहा है और उचित मुआवजे तथा कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
प्रार्थी ने शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज संलग्न किये हैं, जिनमें डॉक्टर द्वारा जारी हेमोग्लोबिन रिपोर्ट, सीएचसी अकलेरा का रैफर कार्ड, टीकाकरण रजिस्टर की प्रति, टीकाकरण कंप्यूटर रिकॉर्ड और ब्लीडिंग से संबंधित डॉक्टर द्वारा स्वीकार की गई विडियो शामिल है। उन्होंने झालावाड़ पुलिस अधीक्षक से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सीसीटीवी फुटेज निकलवाने व दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया है।
पिडित सुधीर मेवाडा अकलेरा में किराये के मकान में अपनी पत्नी और दो बच्चियो के साथ रहता है ।परिवार चलाने के लिये किराये की दुकान में ईमित्र की दुकान चलाता है।पत्नी की मौत के बाद अब एक नवजात शिशु सहित तीन नन्हे बच्चो को पालने का संकट खडा हो गया है।पीडित के पहले से एक 3वर्ष व दूसरी 6वर्ष की बच्चियां है।
