Samvaddata brijmohan Sharma
झालावाड़/अकलेरा, 31 जनवरी 2026: अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण समाज, अकलेरा ने अपने आराध्य देव भगवान विश्वकर्मा की जयंती शनिवार को अभूतपूर्व उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई। यह पर्व समाज के पारंपरिक शिल्पकार स्वरूप को जीवंत करता है, जहां कारीगरी और सृजन की पूजा के साथ-साथ सामाजिक एकता का संदेश भी प्रसारित होता है। कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार रात्रि को खारपा रोड स्थित समाज की धर्मशाला परिसर में आयोजित भव्य भजन संध्या से हुई, जिसमें भक्तिमय भजनों ने वातावरण को दिव्य बना दिया।
*विधिवत पूजा और भव्य शोभायात्रा का आयोजन-
शनिवार प्रातःकाल समाज के सदस्यों ने भगवान शिल्पकार विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार और दीप-आरती के बीच वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया। इसके ठीक बाद सुबह 10:30 बजे धर्मशाला से एक भव्य शोभायात्रा रवाना हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों—स्वामी विवेकानंद चौराहा, शहीद मुकुट बिहारी सर्किल, मुख्य बाजार,रामद्वारा,भोपालनाका होते हुये —पुनः धर्मशाला परिसर में समाप्त हुई।शोभायात्रा में बैंड-बाजों की धुनों पर नाचते-गाते समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। भगवान विश्वकर्मा की आकर्षक झांकियां, जिसमें सजी मूर्तियां और शिल्पकला के प्रतीक थे, दर्शकों का ध्यान खींचती रहीं। तोरणद्वारों पर फूलों की मालाएं, रंग-बिरंगे गुब्बारे और विद्युत सज्जा ने पूरे मार्ग को उत्सवमय बना दिया। स्थानीय निवासियों ने घरों की छतों से फूल बरसाते हुए शोभायात्रा का स्वागत किया, जिससे शहर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
*प्रतिभा सम्मान समारोह: उज्ज्वल भविष्य की नींव–
शोभायात्रा के समापन पर धर्मशाला परिसर में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समाज की विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, व्यवसाय, कला और सामाजिक सेवा—में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली कई प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। विशेष रूप से कक्षा 10वीं और 12वीं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र, ट्रॉफी भेंट किए गए। इस समारोह ने युवाओं में पढ़ाई के प्रति उत्साह जगाया और समाज को गौरवान्वित किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन रामबाबू अध्यापक (अकतासा वाले) ने किया, जिनकी वाक्पटुता ने सभी को बांधे रखा।
*भामाशाहों का उदार सहयोग और सामूहिक भोज–
कार्यक्रम के मुख्य सहयोगी भामाशाह व्याख्याता महेंद्र जांगिड़ ने पूरे आयोजन को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके सहयोग से सामूहिक भोज का भव्य प्रबंध किया गया, जिसका संपूर्ण व्यय उन्होंने स्वयं वहन किया। समाज के मनोज जांगिड़ (पुत्र फूलचंद जांगिड़) ने 51,000 रुपये की सहयोग राशि भेंट की, जबकि अन्य सदस्यों ने 1,500, 2,100 और 5,000 रुपये की रसीदें कटवाकर समाज को आर्थिक मजबूती प्रदान की।महावीर जांगिड़ (ई-मित्र वाले) ने व्यवस्था, पार्किंग और सुरक्षा जैसे कार्यों में विशेष योगदान दिया, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
*अध्यक्ष का संदेश: एकता और जागरूकता का प्रतीक–
समाज के अध्यक्ष भरत जांगिड़ ने बताया, “जांगिड़ ब्राह्मण समाज पारंपरिक रूप से शिल्प, धातु कला और सृजनात्मक कार्यों से जुड़ा रहा है। भगवान विश्वकर्मा हमारा आराध्य देव हैं, जिनकी जयंती हम हर वर्ष हर्षोल्लास से मनाते हैं। ऐसे आयोजन समाज में नवचेतना जगाते हैं, आपसी एकजुटता बढ़ाते हैं तथा समाज सुधार व सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहित करते हैं।”यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज को मजबूत बनाने का माध्यम भी सिद्ध हुआ। स्थानीय लोगों ने आयोजन की भव्यता की सराहना की और आगामी वर्षों में भी ऐसे कार्यक्रमों की अपेक्षा जताई।
